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राजस्थान का रण जीतना आसान नहीं है कांग्रेस के लिए

देश में चुनावी माहौल है क्योंकि बहुप्रतिक्षित 3 राज्यों के विधानसभा चुनावों की तिथि नजदीक आ रही है।चुनावी सर्वे और प्रत्याशियों की सूचियां जारी होने लगी हैं।

चुनावों में सबसे रोमांचक चुनाव राजस्थान राज्य का माना जा रहा है क्योंकि वहां की वसुन्धरा राजे की सरकार के दोहरने की उम्मीद को अभी तक आए सर्वे नकार रहे हैं।परिस्थितियां अजीबो गरीब हालात से गुजर रही हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह आश्वस्त है कि राजस्थान में भाजपा को कोई खतरा नहीं है।

वसुन्धरा राजे को एक सख्त प्रशासक के रूप में जाना जाता है और राजस्थान में विकास की जो गति है व वर्तमान राजस्थान ने बीते 5 साल में विकास का चहुमुंखी आंकड़ा प्राप्त किया है वो भी दिखता है।

राजधानी जयपुर हो या बड़े शहर जोधपुर, अजमेर, कोटा अथवा उदयपुर में बीते 5 साल में जीवन स्तर व शिक्षा के स्तर के साथ जन सुविधाओं में प्रगति होना वसुन्धरा सरकार की उपलब्धियां गिनाता है।

कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी की चुनाव पूर्व व चुनाव घोषणा के बाद टिकट वितरण में हुई अंतर्कलह का फायदा उठाना चाहती है जबकि भीतरघात कांग्रेस में भी कम नहीं हैं।

मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में सचिन पायलट को युवा चेहरा के रूप में पार्टी प्रचारित कर रही है लेकिन वरिष्ठ अशोक गहलोत का कोई तोड़ नहीं है।

सचिन पायलट को मात्र 21 फीसदी लोग प्रदेश की पसंद मान रहे हैं।

राहुल गांधी के प्रचार में मुद्दों की जगह आरोप ज्यादा होते हैं जो कि जनता को मजाक लगते हैं क्योंकि राजस्थान ने विकास किया है।

वसुन्धरा राजे अभी भी मुख्यमंत्री के रूप में राज्य के लोगों की पहली पसंद 36 फीसदी के साथ बनी हुई हैं जबकि अशोक गहलोत को करीब 30 फीसदी लोग मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।

सबसे अहम पहलू इस बार बहुजन समाज पार्टी के द्वारा राजस्थान में बड़ी संख्या में अपने प्रत्याशी उतारना है जो कि जीतें या न जीतें लेकिन कांगेस का खेल बिगाड़ते जरूर दिख रहे हैं।

राजस्थान का इतिहास रहा है कि वहां की जनता ने प्रत्येक 5 साल में सरकार बदली है पर इस बार इतिहास खुद को दोहराता है या खुद इतिहास बन जाता है यह देखना रोचक होगा क्योंकि राज्य की पूरी 26 लोकसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है और भाजपा की संगठनात्मक शक्ति का मतदाताओं को खींचना एक बड़ा खाका खींचता रहा है।

 

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राजस्थान में बाढ़ के हालात और बिगड़े

जयपुर/ राजस्थान के कई जिलों में बाढ़ और बारिश का कहर जारी है। प्रदेश में बाढ़ के चलते बुरे हालात हैं। कई जिलों में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। जालौर और बांसवाड़ा में बारिश के कारण बुरा हाल है।

राजधानी जयपुर में रविवार को सुबह से बादल छाए रहे। मौसम विभाग के मुताबिक, पिछले 24 घंटों के दौरान अधिकतम आर्द्रता 79 फीसदी दर्ज की गई। वहीं रविवार को हल्की बारिश अथवा गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं।

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो दिन तक पूर्वी राजस्थान में बहुत तेज हवा के साथ भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है।

राजस्थान में भारी बारिश के चलते हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। बारिश के चलते राज्य के 11 जिले सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं।

इन जिलों में प्रतापगढ़, जोधपुर, झालावाड़, सिरोही, अजमेर, उदयपुर, कोटा, भीलवाड़ा, पाली, जालोर और बाड़मेर शामिल है। राज्य के कई गांव बारिश के चलते जलमग्न हो गए हैं। भारी बारिश के चलते बांध ओवरफ्लो हो चुके हैं औैर तालाब भी लबालब हैं। नदियों के उफान पर होने से लोगों की दिक्कत आैर बढ़ गर्इ है।

पाली जिले में आठ दिन तक आकेली फीडर से पानी को डाइवर्ट करके पाली शहर मे बाढ़ का खतरा प्रशासन ने टाल दिया।

मगर शनिवार रात को लोर्डिया बांध और लखोटिया तालाब के ओवरफ्लो होने से पाली शहर में रविवार सुबह 6 बजे पानी घुस गया।यहां रामदेव रोड़ और सिंधी कॉलोनी में चार फीट पानी घुसा। दुर्गा कॉलोनी, रामदेव रोड, पीएंडटी कॉलोनी, ढंड नाडी, आशापुरा नगर , खोडिया बालाजी, शेखावत नगर समेत एक दर्जन कॉलोनी में रविवार सुबह बाढ़ के हालात हो गए। इन जगहों पर तीन से चार फीट पानी पानी बह रहा है।

लोग मकानों मे एक तरह से क़ैद हो गए है। इन बस्तियों में पिछले साल जैसे बाढ़ के हालात हो गए है।

रविवार को सुबह 7 बजे तक पानी की आवक तेज होने से इन जगहों पर पानी और बढ़ रहा है।

बारिश के चलते जवाई बांध के 6 गेट खोलने पड़े हैं।

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राहुल गांधी राजस्थान के किसानों की समस्या समझेंगे

जयपुर/ राजस्थान में किसानों की बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं और किसान आंदोलन का कांगे्रस ने राजनीतिक लाभ उठाने की रणनीति बनाई है। इसी लिहाज से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी 19 जुलाई को प्रदेश के दौरे पर रहेंगे।

राहुल गांधी 19 जुलाई को बांसवाड़ा में किसान सम्मेलन को संबोधित करने के बाद गांवों में जाकर किसान परिवारों से मुलाकात करेंगे। कांग्रेस ने बांसवाड़ा में किसान सम्मेलन करने का निर्णय अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए लिया है।

आजादी के बाद से ही कांग्रेस के गढ़ रहे आदिवासी जिलों बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ में पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को काफी सफलता मिली थी। इस दौरान कांग्रेस के कई बड़े दिग्गज नेता चुनाव हार गए थे। आजादी के बाद पहली बार बड़ी सफलता मिलने से उत्साहित मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इन तीन आदिवासी जिलों पर अधिक ध्यान देना प्रारंभ किया।

वसुंधरा राजे ने इस जिलों के आदिवासी नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियों के माध्यम से उपकृत कर पार्टी के विस्तार की जिम्मेदारी सौंपी। सीएम ने मंत्रियों को भी इन जिलों में अधिक ध्यान देने के निर्देश दिए। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी भी पिछले एक वर्ष से लगातार इन आदिवासी जिलों का दौरा कर रहे हैं। आदिवासी किसानों के बीच भाजपा के आदिवासी नेताओं को भेजा जा रहा है।

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राजस्थान के बाड़मेर में मार्च महीने में गर्मी का 71 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

जोधपुर: राज्स्थान के बाड़मेर में मार्च में गर्मी का 71 साल पुराना रिकॉर्ड टूट गया है। यहां सोमवार को टेम्परेचर 44.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले यहां 30 मार्च 1946 को 43.3 डिग्री सेल्सियस टेम्परेचर रिकॉर्ड किया गया था।

वेदर डिपार्टमेंट पहले ही कह चुका है कि इस बार रिकार्ड गर्मी पड़ सकती है, लेकिन मार्च में ही यह अपने तेवर दिखाने लगेगी इसका अंदाजा नहीं था। 

उधर, जोधपुर में भी मार्च में गर्मी का 33 साल का रिकॉर्ड टूटा। सोमवार को यहां टेम्परेचर 41.5 डिग्री पर पहुंच गया। इससे पहले यहां मार्च में सबसे ज्यादा टेम्परेचर 1984 में 41.6 डिग्री रहा था। 

जैसलमेर में 58 साल का रिकॉर्ड टूटा। यहां पारा 42.3 डिग्री पर पहुंच गया। इससे पहले यहां 24 मार्च 1958 को सबसे ज्यादा टेम्प्रेचर 41.6 डिग्री दर्ज किया गया था। राज्य के ज्यादातर हिस्सों में इस साल सिर्फ 10 में ही मैक्सिमम टेम्प्रेचर में 10 डिग्री का उछाल आया है।

जोधपुर में वेदर डिपार्टमेंट के साइंटिस्ट गोविन्द राम सिरवी का कहना है कि इस बार साउथ-वेस्ट एयर के जल्दी ऊपर उठने के कारण मौसम में अचानक बदलाव आया रहा है। वेदर डिपार्टमेंट के मुताबिक, फिलहाल टेम्परेचर नॉर्मल से 2-3 डिग्री ज्यादा है। अगले कुछ दिनों तक गर्मी के ऐसे ही तेवर रहेंगे। हालांकि, रेगिस्तानी इलाकों में रात कुछ ठंडी रहने से लोगों को राहत मिलती रहेगी।

वेदर डिपार्टमेंट पहले ही कह चुका है कि इस बार रिकार्ड गर्मी पड़ सकती है, लेकिन मार्च में ही यह अपने तेवर दिखाने लगेगी इसका अंदाजा नहीं था। 

उधर, जोधपुर में भी मार्च में गर्मी का 33 साल का रिकॉर्ड टूटा। सोमवार को यहां टेम्परेचर 41.5 डिग्री पर पहुंच गया। इससे पहले यहां मार्च में सबसे ज्यादा टेम्परेचर 1984 में 41.6 डिग्री रहा था। 

जैसलमेर में 58 साल का रिकॉर्ड टूटा। यहां पारा 42.3 डिग्री पर पहुंच गया। इससे पहले यहां 24 मार्च 1958 को सबसे ज्यादा टेम्प्रेचर 41.6 डिग्री दर्ज किया गया था। राज्य के ज्यादातर हिस्सों में इस साल सिर्फ 10 में ही मैक्सिमम टेम्प्रेचर में 10 डिग्री का उछाल आया है।

जोधपुर में वेदर डिपार्टमेंट के साइंटिस्ट गोविन्द राम सिरवी का कहना है कि इस बार साउथ-वेस्ट एयर के जल्दी ऊपर उठने के कारण मौसम में अचानक बदलाव आया रहा है। वेदर डिपार्टमेंट के मुताबिक, फिलहाल टेम्परेचर नॉर्मल से 2-3 डिग्री ज्यादा है। अगले कुछ दिनों तक गर्मी के ऐसे ही तेवर रहेंगे। हालांकि, रेगिस्तानी इलाकों में रात कुछ ठंडी रहने से लोगों को राहत मिलती रहेगी।

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