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फ्रांस की फर्स्ट लेडी के बारे में अजीब बोल गये डोनाल्ड ट्रंप

पेरिस/ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर अपने विवादित बयानों से चर्चा में रहते हैं.मीडिया सूत्रों के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को फ्रांस की फर्स्ट लेडी ब्रिजीट मैक्रों पर इसी तरह का कमेन्ट किया.

फ्रांस के दौरे पर गए अमेरिकी राष्ट्रपति अपने फ्रांस के अपने समकक्ष इमैनुअल मैक्रों से द्विपक्षीय वार्ता की और साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. इससे पहले इमैनुअल मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिजीट मैक्रों ने ट्रंप का वेलकम किया.इसी दौरान मेलानिया ट्रंप के साथ दौरे पर गए अमेरिकी राष्ट्रपति ने फर्स्ट लेडी ब्रिजीट मैक्रों के दोनों गालों पर पैरिस स्टाइल में किस किया. ट्रंप काफी देर तक उनके दोनों हाथ पकड़कर खड़े रहे.

डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिजीट मैक्रों मिले तो ट्रंप ने कहा- 'क्या आप जानती हैं, आपकी शेप कितनी बेहतरीन है. हालांकि 64 साल की ब्रिजीट ने ट्रंप के इस कमेंट पर कोई जवाब नहीं दिया.' इसके बाद डोनाल्ड ने उन्हें 'ब्यूटीफूल' कहकर संबोधित किया. जिस वक्त डोनाल्ड यह कमेंट कर रहे थे उस समय मेलानिया भी उनके पास खड़ी थीं, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया के बारे में कुछ पता नहीं चल पाया.

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फ़्रान्स द्वारा सऊदी अरब को करोड़ों यूरो के हथियार बेचने की मंज़ूरी

पेरिसः फ़्रान्स के राष्ट्रपति फ़्रान्सवा ओलान्द ने सऊदी अरब को 45 करोड़ यूरो के हथियार बेचने के सौदे को मंज़ूरी दे दी है। इनमें से ज़्यादातर हथियार यमन पर हमले में इस्तेमाल किए जाएंगे। फ़्रान्स के रक्षा मंत्रालय ने आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में सऊदी अरब को अपना घटक बताते हुए खुल कर इस देश को हथियार बेचने का बचाव किया है।

फ़्रान्स की सोशलिस्ट सरकार ने, जो अपने आपको मानवाधिकार का रक्षक बताती है, सऊदी अरब को बड़े पैमाने पर हथियार बेचे जाने की मंज़ूरी देकर, यमन के निर्दोष व निहत्थे लोगों का और अधिक रक्तपात करने के लिए आले सऊद को प्रोत्साहित किया है। पेरिस ने हमेशा ही मध्यपूर्व के मामलों में रियाज़ की मर्ज़ी की नीति अपनाई है और इसका कारण भी स्पष्ट है क्योंकि सऊदी अरब दुनिया में तेल का सबसे बड़े विक्रेता और हथियारों का सबसे बड़ा ख़रीदार है। यही कारण है कि फ़्रान्स के अधिकारियों ने अपनी सऊदी अरब की यात्राओं में हमेशा इस बात की कोशिश की है कि अपनी नीतियों को आले सऊद की नीतियों से निकट बता कर रियाज़ के साथ व्यापार और हथियारों के बड़े बड़े सौदे करें।

वस्तुतः अमरीका और ब्रिटेन के बाद अब फ़्रान्स ने भी हथियार बनाने की अपनी कंपनियों में काम करने वाले हज़ारों मज़दूरों का रोज़गार बनाए रखने और अधिक से अधिक लाभ कमाने के लिए यमन में पिछले दो साल से जारी सऊदी अरब के जघन्य अपराधों की ओर से आंखें मूंद ली हैं। यह बात मानवाधिकार के संबंध में पश्चिम के दोहरे रवैये की परिचायक है। मानवाधिकार की विभिन्न संस्थाओं की ओर से यमन में आम नागरिकों के जनसंहार और असैनिक प्रतिष्ठानों पर सऊदी अरब व उसके घटकों के युद्धक विमानों की बमबारी के संबंध में दसियों रिपोर्टें सामने आने के बावजूद पश्चिमी सरकारें इन रिपोर्टों की निरंतर अनदेखी कर रही हैं और रियाज़ को विभिन्न प्रकार की गुप्तचर व सैन्य सहायताएं प्रदान कर रही हैं। 

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यूरोपिय संघ डोनाल्ड ट्रंप का दबाव स्वीकार नहीं करेगा

वैलेटा: फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने अपने अमेरिकी समकक्ष डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यूरोपीय संघ पर बनाए जा रहे दबाव को ‘अस्वीकार्य’ करार देते हुए इसकी आलोचना की।माल्टा में यूरोपीस संघ के एक शिखर सम्मेलन में ओलांद ने संवाददाताओं से कहा, ‘अमेरिका के राष्ट्रपति की ओर से दिए गए कुछ बयान अस्वीकार्य होना चाहिए।

यूरोपीय संघ पर दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘कौन जानता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति क्या चाहते हैं, खासकर अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ के लिए क्या चाहते हैं तथा खचरें को साझा वहन करने पर वह क्या चाहते हैं जिसे उन्होंने बोझ करार दिया है।’ जर्मनी की चांसलर एजेंला मर्केल ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन के साथ यूरोपीय संघ के निपटने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि यूरोप अपनी खुद की योजनाओं के साथ आगे बढ़े।

 

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फ्रांस ने डोनल्ड ट्रम्प के बयान को यूरोप विरोधी बताया

पेरिसः फ़्रांसीसी राष्ट्रपति फ़्रांस्वा ओलांद ने जर्मनी के बारे में दिए गए अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के बयान की निंदा करते हुए कहा है कि यूरोप को क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इस बारे में किसी की सलाह की ज़रूरत नहीं है।

ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल की बड़ी संख्या में शरणार्थियों को शरण देने की नीति एक भयानक ग़लती है।मर्केल ने भी ट्रम्प के इस बयान की आलोचना करते हुए कहा था कि ट्रम्प को अपने का से काम रखना चाहिए और यूरोपीय संघ अपनी नीतियों के निर्धारण में आज़ाद है।

ओलांद का कहना है कि यूरोप अमरीका के साथ सहयोग जारी रखने के लिए तैयार है, लेकिन हर क़ीमत पर नहीं।ओलांद के सरकार के पूर्व प्रधान मंत्री मैनुअल वाल ने ट्रम्प के बयान की आलोचना करते हुए इसे यूरोप के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा बताया है।

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