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उत्तर कोरिया पर मिलकर दबाव बनायेंगे जापान और अमेरिका

हैमबर्ग/ जापान के प्रधान मंत्री शिंज़ो आबे और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प उत्तर कोरिया पर दबाव बढ़ाने के मुद्दे को लेकर मिल कर काम करने पर सहमत हो गए हैं। उत्तर कोरिया अपना परमाणु तथा मिसाइल कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ाता जा रहा है।

दोनों नेताओं ने जर्मनी के हैमबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन से अलग मुलाकात की। यह उनकी तीसरी प्रत्यक्ष बैठक थी।ट्रम्प ने कहा कि उत्तर कोरिया "एक समस्या और खतरा" है। उन्होंने कहा कि वे आबे के साथ उत्तर कोरिया के मुद्दे पर चर्चा जारी रखेंगे।

आबे ने कहा कि उत्तर कोरिया पर दबाव बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हाल ही में अमरीका और दक्षिण कोरिया के साथ हुई शिखर बैठकें सार्थक रहीं क्योंकि देशों ने एक बार फिर से उत्तर कोरिया के विरुद्ध अपने एकजुट रुख की पुष्टि की।

आबे और ट्रम्प के बीच सहमति हुई कि दोनों नेताओं के आपसी निकट संबंध और दोनों देशों का गठजोड़ क्षेत्रीय तथा वैश्विक समृद्धि में योगदान करेंगे।

ट्रम्प ने जापान के साथ अमरीका के व्यापार घाटे का ज़िक्र करते हुए परस्पर लाभकारी व्यापार संबंधों का आग्रह किया। आबे ने कहा कि वे चाहते हैं कि उप प्रधान मंत्री तारो आसो और उप राष्ट्रपति माइक पेन्स इस वर्ष बाद में जापान-अमरीका आर्थिक वार्ता के मुद्दे पर रचनात्मक चर्चा करें।

आबे ने ट्रम्प को बताया कि वे राष्ट्रपति की जापान यात्रा को लेकर उत्सुक हैं। जवाब में ट्रम्प ने कहा कि वे जल्द जापान आना चाहते हैं।

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अफगानिस्‍तान से जर्मनी तक लगे पाक विरोधी नारे

बर्लिन: बलूचिस्‍तान को आजाद करने की मांग करने वाली सभी राजनीतिक पार्टियों ने पाकिस्‍तान पर इस क्षेत्र में अवैध कब्‍जा करने का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। बलूचिस्‍तान में पाकिस्‍तान द्वारा चलाए जा रहे दमनचक्र के खिलाफ पूरी दुनिया का ध्‍यान खींचने के मकसद बलूच लोगों ने सोमवार का दिन 'बलूचिस्‍तान ऑक्‍योपाइड डे' काला दिवस के तौर पर मनाया। इस मौके पर जर्मनी से लेकर अफगानिस्‍तान तक में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। फ्री बलूचिस्‍तान मूवमेंट के तहत किए गए इन कार्यक्रमों में पाकिस्‍तान की जमकर आलोचना की गई। इस दौरान बलूचिस्‍तान को पाकिस्‍तान के चंगुल से आजाद कराने के लिए पर्चे भी बांटे गए।

आजाद बलूचिस्‍तान के समर्थकों और एफबीएम कार्यकर्ताओं ने #BalochistanIsNotPakistan (बलूचस्तिान पाकिस्‍तान नहीं) के साथ सोशल मीडिया पर भी अपनी मुहिम चलाई है। सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी को ज्‍यादा से ज्‍यादा शेयर करते हुए कहा गया है कि पाकिस्‍तान ने मार्च 1948 से इस क्षेत्र पर अवैध रूप से कब्‍जा जमाया हुआ है। इसको लेकर एफबीएम के कार्यकर्ताओं ने जर्मनी में बर्लिन गेट पर पाकिस्‍तान के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी की। यह प्रदर्शनकारी अपने हाथों में बड़े-बड़े बैनर लिए हुए थे। कुछ बैनरों में पाकिस्‍तान द्वारा ब‍लूचिस्‍तान में मारे गए लोगों के फोटो भी लगे थे।

इनका कहना था कि पाकिस्‍तान लगातार यहां के लोगों पर जुल्‍म ढहा रहा है और उन्‍ाकी नृशंस हत्‍या कर रहा है। इस दौरान दिए गए भाषणों में बलूच नेताओं ने कहा कि पाकिस्‍तान की सेना बलूचिस्‍तान में लगातार आम लोगों पर हमला कर उन्‍हें मौत के घाट उतारने का काम कर रही है। इस प्रदर्शन का आयोजन एफबीएम कार्यकर्ता फतह जन बलूच ने किया था। उनका कहना था कि इस प्रदर्शन का मकसद पूरी दुनिया को पाकिस्‍तान का वह घिनौना चेहरा दिखाना है, जो सामने नहीं आ सका है। उन्‍होंने कहा कि वह इसके जरिए दुनिया को बताना चाहते हैं कि बलूचिस्‍तान पर पाकिस्‍तान ने अवैध कब्‍जा कर रखा है और बलूच किसी भी सूरत से पाकिस्‍तान के साथ रहने को तैयार नहीं हैं।

 

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संरक्षणवाद को ठुकराने में नाकाम रहा जी-20 वक्तव्य

बादेन-बादेन: 20 अर्थव्यवस्थाओं के समूह यानी जी-20 के सर्वोच्च वित्तीय अधिकारी अपने संयुक्त वक्तव्य में संरक्षणवाद के विरुद्ध लड़ाई का संकल्प शामिल करने में नाकाम रहे हैं। वित्त मंत्रियों और केन्द्रीय बैंक के गर्वनरों की 2 दिवसीय बैठक जर्मनी के बादेन-बादेन शहर में संपन्न हुई।जनवरी में अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यभार संभालने के बाद से विश्व की प्रमुख शक्तियों ने पहली बार अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर चर्चा की।

 

जी-20 के वक्तव्य को ट्रम्प की अमरीका सर्वोपरि जैसी संरक्षणवादी नीतियों को छूट देने के रूप में देखा जा रहा है। वक्तव्य में ''सभी प्रकार के संरक्षणवाद का मुकाबला करने" का आग्रह नहीं किया गया है। हालांकि मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने वाले जी-20 के रुख को रेखांकित करने के लिए पिछली विज्ञप्तियों में यह वाक्य शामिल किया जाता रहा है।

 

इसकी बजाय वक्तव्य में कहा गया है कि देश "अपनी अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार के योगदान को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं।"वक्तव्य में जलवायु परिवर्तन से संबद्ध पेरिस समझौते का भी कोई ज़िक्र नहीं किया गया है। ट्रम्प वैश्विक तापमान वृद्धि को एक "छलावा" करार देते हुए पेरिस समझौते से निकलने का संकेत दे चुके हैं।

 

जी-20 सदस्यों ने मुद्रा नीति पर हुए पिछले समझौतों को वक्तव्य में बरकरार रखा है। वे इस बात पर सहमत हुए कि विनिमय दरों में आवश्यक्ता से अधिक उतार-चढ़ाव और गड़बड़ी से आर्थिक तथा वित्तीय स्थिरता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने प्रतिस्पर्धात्मक अवमूल्यन से बचने और निर्यात बढ़ाने जैसे प्रतिस्पर्धात्मक उद्देश्यों के लिए विनिमय दरों को निशाना न बनाने के अपने संकल्प की दोबारा पुष्टि भी की।

 

विश्लेषकों के अनुसार संरक्षणवाद को ठुकराने जैसे मूल सिद्धान्त को शामिल करने में जी-20 की नाकामी ने समन्वय की अपनी व्यवस्था के लिए समस्या खड़ी कर दी है। विश्लेषकों का कहना है कि संरक्षणवादी अमरीका जापान पर भी अधिक हावी हो गया है। दोनों देश व्यापार और अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए अप्रैल के मध्य में उच्च स्तरीय आर्थिक वार्ता आरम्भ करने की तैयारियाँ कर रहे हैं।

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जर्मनी के स्टेशन पर सनकी ने किया कुल्हाड़ी से हमला, 6 जख्मी

बर्लिन: जर्मनी के पश्चिमी शहर डसेलडोर्फ में गुरुवार को एक शख्स ने  किया जिसमें 6 लोग घायल हो गए.इस हमले के संबंध में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है. घायलों में से एक की हालत गंभीर बनी हुई है.स्थानीय समाचार पत्र बिल्ड के हवाले से बताया कि हमलावर ने भीड़ पर कुल्हाड़ी से हमला किया. हर तरफ खून ही खून था.

हालांकि, हमलावर ने घटनास्थल से भागने की कोशिश की लेकिन पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ लिया. एक अन्य संदिग्ध को रेलवे स्टेशन से ही गिरफ्तार किया गया. अभी तक इनके उद्देश्यों का पता नहीं चल पाया है.संदिग्धों की पहचान भी उजागर नहीं की गई है.संघीय पुलिस ने इस घटना को ‘पागलपन में किया गया हमला’ करार दिया है.

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