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ओआईसी ने आपात बैठक में मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की

इस्तांबूल/ तुर्की के शहर इस्तांबूल में ओआईसी के विदेश मंत्रियों की अपात बैठक समाप्त हुई। बैठक में मस्जिदुल अक़सा और बैतुल मुक़द्दस के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन की दुस्साहसी कार्यवाहियों की कड़ी निंदा की गई।

 

बैठक के समापन पर जारी होने वाले बयान में मुसलमानों के पहले क़िबले मस्जिदु अक़सा की रक्षा के लिए मुसलमानों की एकता पर ज़ोर दिया गया।

ज़ायोनी शासन ने 14 जुलाई सन 2017 से ज़ायोनी प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू के आदेश पर फ़िलिस्तीनियों का दमन तेज़ कर दिया है इस दौरान सैकड़ो फ़िलिस्तीनी शहीद और घायल हुए हैं।

ज़ायोनी शासन बैतुल मुक़द्दस और मस्जिदुल अक़सा के ख़िलाफ एसी स्थिति में यह हरकतें कर रहा है कि जब युनेस्को ने गत वर्ष एक प्रस्ताव पारित करके कहा था कि बैतुल मुक़द्दस विशेष रूप से मस्जिदुल अक़सा से यहूदियों का कोई एतिहासिक या धार्मिक रिश्ता नहीं है यह मुसलमानों का पवित्र धार्मिक स्थल है।

जारी वर्ष में 2 मई को भी संस्था ने एक बयान जारी करके बैतुल मुक़द्दस और गज़्ज़ा पट्टी में ज़ायोनी शासन के हाथों अंतर्राष्ट्रीय नियमों के हनन की निदां की थी।

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तुर्की ने सात हजार से अधिक सरकारी कर्मचारी हटाये

अंकारा/ तुर्की ने गत वर्ष हुए असफल सैन्य तख्तापलट के प्रयासों में शामिल होने के आरोप में लगभग सात हजार से ज्यादा पुलिस, मंत्रालयों के कर्मचारियों और शिक्षाकर्मियों को बर्खास्त कर दिया है। सरकार ने यह कार्रवाई न्यायपालिका, पुलिस और शिक्षा से संबंधित सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता लाने के लिए की है। तुर्की में उस घटना को एक साल होने को है जब कुछ अनियंत्रित सैनिकों ने इमारतों पर बम हमला किया था और आम नागरिकों पर गोलियां चलाई थीं। 

तुर्की अधिकारियों ने इस तख्तापलट की कोशिशों के लिए मुस्लिम धर्मगुरु फतेउल्लाह गुलेन पर आरोप लगाया था, जिसमें जुलाई 2016 में प्रेसिडेंट तैय्यप एर्दोगन को सत्ता से हटाने की कोशिश की गई थी। हालांकि, अमेरिका में रहने वाले गुलेन ने उस तख्तापलट में किसी भी भूमिका से इनकार किया था। तबसे अमेरिका ने गुलेन के प्रत्यर्पण की तुर्की की मांग पर चुप्पी साध रखी है। कर्मचारियों को बर्खास्त करने का आदेश पांच जून का है जिसे शुक्रवार को सरकारी गजट में प्रकाशित किया गया।

गौरतलब है कि 16 जुलाई 2016 को हुई उस हिंसा में 250 से ज्यादा लोग मारे गए थे। बर्खास्त किए गए लोगों में 2,303 पुलिस अधिकारी, 302 यूनिवर्सिटी शिक्षक, 342 सेवानिवृत्त कर्मचारी और सैनिक शामिल हैं। तख्तापलट की कोशिशों के बाद से तुर्की ने पहले ही डेढ़ लाख अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है और 50 हजार से अधिक लोगों को सेना, पुलिस और दूसरे क्षेत्रों से गिरफ्तार किया है।

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तुर्की में संविधान सुधार के लिए जनमत संग्रह

अंकाराः तुर्की की डेवलपमैंट एंड जस्टिस पार्टी ने ऐसी स्थिति में संसद से संविधान में सुधार को लेकर जनमत संग्रह के आयोजन की अनुमति प्राप्त कर ली है कि जब तुर्क सरकार को कड़ी प्रतिक्रिया और विरोध का सामना है।विपक्षी पार्टियों और विभिन्न संगठनों ने इस जनमत संग्रह के विरोध में एक अभियान शुरू किया है। इन पार्टियों और संगठनों का कहना है कि वह लोगों से अपील कर रहे हैं कि तुर्की की सत्ताधारी पार्टी द्वारा संविधान बदलने के विरुद्ध वोट करें। इस अभियान के बारे में इस्तांबूल के एक राजनीतिज्ञ जमाल जान पोलात का कहना है कि हम एक कठिन चरण में प्रवेश कर रहे हैं और इस अभियान ने हमारे कांधों पर भारी ज़िम्मेदारी डाल दी है।

तुर्क राजनीतिज्ञ पोलात के मुताबिक़, जनता भय के साम्राज्य को इस अभियान द्वारा पीछे धकेद देंगे। इसलिए कि भय के इस साम्राज्य की शुरूआत 7 जून को चुनावों के बाद हुई और डेवलपमैंट एंड जस्टिस पार्टी के नेतृत्व में इसका विस्तार हुआ। इस आधार पर कहा जा सकता है कि जो पार्टी अपने नागरिकों को सुरक्षा उपलब्ध नहीं करा सकती, उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक़ नहीं है।

उल्लेखनीय है कि सत्ताधारी पार्टी तुर्की में संसदीय व्यवस्था के स्थान पर राष्ट्रपति शासन व्यवस्था लाना चाहती है। इसमें कोई शक नहीं है कि अगर जनमत संग्रह में इस पार्टी की हार होती है तो तुर्की की आंतरिक स्थिति काफ़ी ख़राब हो सकती है। वास्तव में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान ने देश की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव के लिए काफ़ी कुछ दाव पर लगाया है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने अपने कई साथियों को किनारे कर दिया और कई राजनीतिज्ञों को जेल की सलाख़ों के पीछ धकेल दिया।

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तुर्की के राष्ट्रपति ने जर्मन चांसलर के शब्दों पर आपत्ति जताई

अंकाराः तुर्की के राष्ट्रपति ने इस्लामी आतंकवाद शब्द का प्रयोग करने के कारण जर्मन चांसलर पर आपत्ति जताई है।  रिपोर्ट के अनुसार रजब तय्यब अर्दोग़ान के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेन्स में अंगेला मर्केल के इस्लामी आतंकवाद कहने पर तुर्की के राष्ट्रपति ने आपत्ति जताई और उसे अनुचित और भड़काऊ बताया।

इस रिपोर्ट के अनुसार तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोगान ने कहा कि इस्लामी आतंकवाद का शब्द मुसलमानों को बिल्कुल पसंद नहीं है और वह अन्यायपूर्ण है इसी कारण यह शब्द सही नहीं है और इसका प्रयोग नहीं किया जाना चाहिये क्योंकि इस्लाम और आतंकवाद दोनों एक साथ नहीं हो सकते हैं। अर्दोगान ने बल देकर कहा कि इस्लाम का अर्श शांति है।इस आधार पर दोनों का शब्दों का एक साथ प्रयोग, कि एक का अर्थ शांति और दूसरे का अर्थ हिंसा है, इस्लाम के अनुयाइयों के आघात पहुंचने का कारण बनेगा।जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने, जो तुर्की की यात्रा पर गयी हैं, गुरूवार को तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोगान से अंकारा में भेंट की और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शरणार्थियों की समस्या और इराक तथा सीरिया के परिवर्तनों आदि के बारे में विचारों का आदान- प्रदान किया।

अंगेला मर्केल ने इस भेंट में तुर्क सरकार के कुछ विपक्षी पार्टियों के नेताओं से भी मुलाकात की।जर्मन चांसलर ने तुर्की के प्रधानमंत्री से भेंट में इस देश की संसद का निरीक्षण किया और प्रसन्नता के साथ कहा कि मैंने उन प्रयासों को देखा जो तुर्की में विद्रोह के लिए किये गये थे और इसी कारण एक बार फिर कहती हूं कि तुर्की के लोगों ने खुलकर इस विद्रोह के मुकाबले में दृष्टिकोण अपनाया और उन्होंने डेमोक्रेसी का समर्थन किया।अंगेला मर्केल ने कहा कि मतभेदों के बावजूद वह तुर्क अधिकारियों से रचनात्मक वार्ता करने का प्रयास करेंगी।

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