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नाइजीरिया में धमाकों में दर्जनों मौतें

बोर्नो/ नाइजीरिया में हुए धमाकों में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई है। यह धमाका पूर्वोत्तरी प्रांत बोर्नो में हुआ है।

स्थानीय सूत्रों ने बताया कि मान्दारारी शहर में उस स्थान पर हुई जहां आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के शिविर स्थापित हैं। पहला धमाका हुआ जिसके बाद दुकानें बंद होने लगीं तो इसी बीच दो और धमाके हुए।बहुत से लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

इस हमले की ज़िम्मेदारी अभी तक किसी गुट ने नहीं ली है लेकिन इस प्रकार के हमलों के लिए बोको हराम नामक तकफ़ीरी चरमपंथी गुट को ज़िम्मेदार माना जाता है।

हालिया हफ़्तों के दौरान बोको हराम के आतंकियों ने बोर्नो में कोई हमले किए हैं। हमलों में मस्जिदों, बाज़ारों और शिविरो को निशाना बनाया गया है।

दिसम्बर 2016 में देश के राष्ट्रति मुहम्मदु बुहारी ने दावा किया था कि सेना ने बोको हराम को कुचल दिया है लेकिन यह संगठन आज भी अपने हमले कर रहा है।

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2.5 अरब के दुर्लभ हीरे पर विवाद,भारतीय के खिलाफ रिपोर्ट

जोहानिसबर्ग/ दक्षिण अफ्रीका में 2.5 अरब मूल्‍य के एक दुर्लभ गुलाबी हीरे को विवाद पैदा हो गया है। इंटरपोल ने इस संबंध में भारतीय मूल के चार कारोबारियों को रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है। रूस के एक टेलिकम्युनिकेशन बिजनसमैन और हीरे के स्थानीय डीलर के बीच हीरे के स्वामित्व को लेकर दावे और कानूनी विवाद के बीच यह नोटिस जारी हुआ है।

भारतीय मूल के जुनैद मोती, उनके पिता अब्बास अबू बकर व उनके दो सहयोगियों अशरफ काका और सलीम बोबत ने रेड कॉर्नर नोटिस के खिलाफ प्रिटोरिया हाई कोर्ट का रुख किया। यह त्रिकोणीय कानूनी लड़ाई फ्रांस, लेबनान, जिम्बाब्वे और दुबई की अदालतों में दो सालों से चल रही है।

रेड नोटिस इंटरपोल द्वारा जारी किया जाने वाला इंटरनेशनल अलर्ट है। इसमें वांछित इंसान के प्रत्यर्पण के लिए उसकी लोकेशन और फिर गिरफ्तारी का प्रावधान है। चारों आरोपियों ने स्थानीय कोर्ट से इंटरपोल की वारंट पर प्रतिबंध लगाने की अपील की है। उनके अनुसार रूसी कारोबारी अलीबेक इसाएव ने धोखाधड़ी से हीरे के कागजात हासिल किए हैं।

भारतीय मूल के कारोबारियों और रूसी कारोबारियों ने एक-दूसरे पर हीरे को चुराने का आरोप लगाया है। हालांकि यह मामला उस समय और भी दिलचस्‍प हो गया, जब डायमंड डीलर सिल्ला मूसा ने 2003 में भारतीय मूल के कारोबारियों पर उसी हीरे को चुराने का आरोप लगाया।

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मिस्र में ट्रेनों की आमने-सामने की टक्कर में 37 मरे

काहिरा/

हादसा अपराह्न दो बजकर 15 मिनट पर हुआ। खोरशिद स्टेशन के पास दोनों की आमने-सामने की टक्कर हुई। हादसे के बाद बचाव कार्य तत्काल प्रभाव से शुरू कर दिया गया। राष्ट्रपति ने हादसे पर शोक जताते हुए इसके पीछे के कारणों की तलाश करने का आदेश दिया है। हादसा इतना जबरदस्त था कि अभी तक लोग बोगियों में फंसे हुए हैं।

एक ट्रेन मिस्र की राजधानी काहिरा से आ रही थी और दूसरी ट्रेन पोर्ट सैद से आ रही थी। खुर्शीद इलाके में दोनों ट्रेनों की टक्कर हो गई। स्वास्थ्य मंत्री के सलाहकार शरीफ वादी ने बताया कि हताहतों की संख्या बढ़ रही है। उन्होंने कहा, 'फिलहाल 109 लोग घायल हैं। इसमें कुछ गंभीर रूप से भी घायल भी शामिल हैं। घायलों को समीपवर्ती अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।'

स्वास्थ्य मंत्रालय में अवर सचिव मागदी हेगाजी ने बताया, 'बचाव दल जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहा है। घायलों को ऐंबुलेन्स के जरिये समीपवर्ती अस्पतालों में ले जाया जा रहा है।'

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तख्तापलट के छह साल बाद जेल से रिहा हुए होस्नी मुबारक

काहिरा: मिस्र के पूर्व प्रेसिडेंट होस्नी मुबारक को छह साल बाद जेल से रिहा कर दिया गया है। वे शुक्रवार को मिलिट्री हॉस्पिटल से अपने घर पहुंचे। 30 साल से सत्ता में काबिज मुबारक को 2011 में लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद पद से हटा दिया गया था। मिस्र के उस विरोध प्रदर्शन को दुनिया ने “अरब क्रांति’ का नाम दिया था।

88 साल के मुबारक के वकीलों ने बताया कि पूर्व प्रेसिडेंट को सत्ता से हटाए जाने के छह साल बाद आजाद कर दिया गया है। वकीलों के मुताबिक अपील कोर्ट के एक जज ने 2015 में ही कहा था कि मुबारक को रिहा किया जा सकता है।

कोर्ट ने इसी महीने उनकी रिहाई के फैसले पर मुहर भी लगा दी। पर संभावित जनाक्रोश के डर से राष्ट्रपति अब्दुल फतह अल सीसी की सरकार उन्हें रिहा नहीं कर रही थी। सीसी, मुबारक के प्रशासन में उनके मिलिट्री इंटेलिजेंस चीफ थे। उन्होंने ही सैन्य तख्तापलट करके 2013 में प्रेसिडेंट बने मोहम्मद मोर्सी को अपदस्थ कर दिया था।

मुबारक पर दो अहम आरोप थे। पहला- अरब क्रांति के दौरान प्रदर्शन करने वालों पर गोली चलाने का आदेश देना। इस गोलीबारी में 800 से ज्यादा लोग मारे गए थे। निचली अदालत ने आरोप सही मानते हुए 2012 में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पर अपीलीय अदालत ने उन्हें रिहा कर दिया। दूसरा आरोप सरकारी पैसों के गबन का था। निचली अदालत ने मुबारक और उनके दो बेटों को इस मामले में तीन साल कैद की सजा सुनाई थी। उनकी यह सजा पहले ही पूरी हो चुकी थी।

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